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बिहान योजना से बदली रीता मिंज की तकदीर, बस परिवहन व्यवसाय से बनीं आत्मनिर्भर

महिला स्व-सहायता समूह से जुड़कर शुरू किया ‘मिंज बस ट्रांसपोर्ट’, आज हर माह करीब 80 हजार रुपये की आय

रायपुर, 17 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेंद्रगढ़ विकासखंड स्थित ग्राम चनवारीडांड की रहने वाली रीता मिंज इसकी प्रेरक मिसाल हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने महिला स्व-सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपना स्वयं का परिवहन व्यवसाय स्थापित किया, बल्कि आज वे क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।

रीता मिंज वर्ष 2017 में गठित वसुंधरा महिला स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। बिहान मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें समूह के माध्यम से प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता और स्वरोजगार के लिए आवश्यक मार्गदर्शन मिला। इससे उन्होंने स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया।

बिहान योजना के अंतर्गत समूह को रिवॉल्विंग फंड, सामुदायिक निवेश निधि और बैंक ऋण के रूप में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई। इस सहयोग और स्वयं के निवेश के आधार पर रीता मिंज ने मिंज बस ट्रांसपोर्ट की शुरुआत की। आज उनका बस परिवहन व्यवसाय सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और इससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 80 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।

रीता मिंज बताती हैं कि व्यवसाय शुरू होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब बच्चों की शिक्षा, घरेलू आवश्यकताओं और अन्य खर्चों की पूर्ति आसानी से हो रही है। साथ ही व्यवसाय के लिए निजी ऋण या साहूकारों पर निर्भर रहने की जरूरत भी समाप्त हो गई है।

उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के गांवों की अनेक महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। रीता मिंज स्वयं भी समूह की बैठकों में महिलाओं को बचत, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करती हैं।

रीता मिंज का कहना है कि बिहान योजना ने उन्हें केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं दिया, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी दिया। उनका मानना है कि यदि शासन की योजनाओं का सही उपयोग किया जाए और मेहनत के साथ आगे बढ़ा जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं।

बिहान मिशन के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को उपलब्ध कराए जा रहे प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और संस्थागत मार्गदर्शन से ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। रीता मिंज की सफलता इस बात का उदाहरण है कि संगठित प्रयास और सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ उठाकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को नई पहचान दी जा सकती है।

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