छत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ जनसंपर्करायपुर

मनरेगा का चेक डेम बना किसानों की नई उम्मीद, 12.5 एकड़ खेतों तक पहुंचेगा सिंचाई का पानी

एमसीबी के माड़ीसरई में अंधेरगढ़ नाला पर बनी स्थायी जल संरचना, भूजल संरक्षण के साथ खेती और रोजगार को मिलेगा नया संबल

रायपुर, 17 जुलाई 2026

एमसीबी के माड़ीसरई में अंधेरगढ़ नाला पर बनी स्थायी जल संरचना, भूजल संरक्षण के साथ खेती और रोजगार को मिलेगा नया संबल

एमसीबी के माड़ीसरई में अंधेरगढ़ नाला पर बनी स्थायी जल संरचना, भूजल संरक्षण के साथ खेती और रोजगार को मिलेगा नया संबल

कभी बारिश का पानी बह जाने से गर्मी में जल संकट झेलने वाले मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के भरतपुर विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत माड़ीसरई के किसानों के लिए अब हालात बदलने की उम्मीद जगी है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत अंधेरगढ़ नाला पर निर्मित पक्का चेक डेम गांव में जल संरक्षण और सिंचाई का स्थायी आधार बनकर उभरा है। इससे लगभग 12.5 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की संभावना है।
ग्रामीणों के अनुसार पहले बरसात का अधिकांश पानी नाले के जरिए बह जाता था। इसके कारण गर्मी के दिनों में खेतों और पेयजल दोनों के लिए संकट पैदा हो जाता था। अब चेक डेम बनने से वर्षा जल का संचयन होगा और किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।
इस परियोजना के निर्माण में 1,185 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ। इससे गांव के श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर काम मिला और रोजगार के लिए बाहर पलायन की जरूरत भी कम हुई। निर्माण कार्य में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली।
चेक डेम से केवल सिंचाई ही नहीं, बल्कि भूजल स्तर में सुधार की भी उम्मीद है। वर्षा जल के संरक्षण से आसपास के कुओं और हैंड पंपों में पानी की उपलब्धता बढ़ने के साथ मिट्टी के कटाव पर भी नियंत्रण मिलेगा। इससे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
ग्रामीण किसानों का कहना है कि अब वे केवल वर्षा आधारित खेती तक सीमित नहीं रहेंगे। सिंचाई सुविधा मिलने से धान के अलावा दलहन, तिलहन और अन्य फसलों की खेती का दायरा भी बढ़ सकेगा, जिससे कृषि उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होने की संभावना है।
ग्रामीणों के अनुसार यह चेक डेम केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि गांव की कृषि व्यवस्था को स्थायी आधार देने वाली परिसंपत्ति है। इससे जल संरक्षण, रोजगार और खेतीकृतीनों क्षेत्रों में दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
माड़ीसरई का यह मॉडल इस बात का उदाहरण बन रहा है कि यदि मनरेगा जैसी योजनाओं के तहत टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण स्थानीय जरूरतों के अनुरूप किया जाए, तो ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और किसानों की आर्थिक मजबूती जैसे कई लक्ष्य एक साथ हासिल किए जा सकते हैं।

Related Articles

Back to top button