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वक्फ संशोधन कानून पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, विरोध में 73 याचिकाएं दाखिल

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट आज वक्फ संशोधन कानून पर दाखिल याचिकाओं की सुनवाई शुरू करने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच वक्फ संशोधन कानून के विरोध और पक्ष में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

वक्फ संशोधन कानून के विरोध में मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने 73 याचिकाएं दाखिल की हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख ओवैसी, एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स के अरशद मदनी समेत कई लोगों ने याचिकाएं दाखिल की हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अब तक 10 याचिकाओं को सूचीबद्ध किया है। इस मुद्दे पर कई नयी याचिकाएं भी शीर्ष अदालत में दायर की गई हैं जिन्हें सूचीबद्ध किया जाना है।

वहीं, बीजेपी शासित 7 राज्यों ने वक्फ संशोधन कानून के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है। केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन कानून के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। यानी बिना केंद्र सरकार की बात सुने सुप्रीम कोर्ट कोई फैसला नहीं दे सकता।

इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ये फैसला भी कर सकता है कि सभी याचिकाओं को जोड़कर मामले पर आगे सुनवाई की जाए। इसके अलावा चूंकि वक्फ संशोधन कानून संविधान से जुड़ा हुआ है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस मसले को फिर संविधान पीठ को भी भेज सकता है।

7 अप्रैल को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल को याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर विचार करने का आश्वासन दिया था। एआईएमपीएलबी ने 6 अप्रैल को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। अधिवक्ता लजफीर अहमद के मार्फत दायर ओवैसी की याचिका में कहा गया है कि वक्फ को दिये गए संरक्षण को कम करना मुसलमानों के प्रति भेदभाव है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 15 का उल्लंघन है।

उधर, वक्फ कानून के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक नया अभियान शुरू किया है जिसका नाम वक्फ बचाव अभियान दिया गया है। इस अभियान का पहला चरण कुल 87 दिनों तक चलेगा। यह 11 अप्रैल से शुरू हो चुका है और 7 जुलाई तक चलेगा। इसे साथ ही वक्फ कानून के विरोध में एक करोड़ लोगों के हस्ताक्षर लिए जाएंगे। इसके बाद अगली रणनीति तय की जाएगी।

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