हंसी के ठहाकों से लेकर मीरा की भक्ति तक, ‘रंग परब’ के दूसरे दिन सजी रंगमंच की महफिल
रंग तरंग भिलाई की छत्तीसगढ़ी हास्य नाटिका और श्री आर्ट संस्था की ‘मीरा’ एकल प्रस्तुति ने बांधा समां, अभिनय और भावाभिव्यक्ति को मिली खूब सराहना

रायपुर, 10 सितंबर 2026


संस्कृति विभाग द्वारा मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस, घड़ी चौक रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय ‘रंग परब’ नाट्य श्रृंखला के दूसरे दिन रंगमंच की विविध शैलियों का प्रभावशाली संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में दो अलग-अलग रंग प्रस्तुतियों ने दर्शकों को कभी हास्य और मनोरंजन से सराबोर किया तो कभी भक्ति, संवेदना और भावनाओं की गहराइयों तक पहुंचाया। कलाकारों के सशक्त अभिनय और मंचीय प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
नाट्य श्रृंखला के दूसरे दिन रंग तरंग भिलाई की ओर से भारत भूषण परगनिहा के निर्देशन में छत्तीसगढ़ी हास्य नाटिका ‘कोन चीज के डायरेक्टर होही’ का मंचन किया गया। छत्तीसगढ़ी लोकभाषा की सहजता, संवादों की चुटीली शैली और कलाकारों के जीवंत अभिनय ने प्रस्तुति को खास बना दिया। हास्य से भरपूर प्रसंगों ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया और पूरे मुक्ताकाशी मंच पर कई बार ठहाके गूंजते रहे। कलाकारों की संवाद अदायगी और मंच पर उनकी सहज उपस्थिति को दर्शकों ने जमकर सराहा।
मीरा की भक्ति और समर्पण का भावपूर्ण चित्रण
दूसरी प्रस्तुति के रूप में श्री आर्ट संस्था, लाखेनगर की ओर से श्रीमती ममता आहार श्रिया ने ‘मीरा’ विषय पर एकल अभिनय प्रस्तुत किया। सीमित मंचीय संसाधनों के बीच एकल कलाकार ने अपने प्रभावशाली अभिनय, संवाद, भाव-भंगिमाओं और भक्ति गीतों के माध्यम से मीरा के व्यक्तित्व और उनके कृष्ण के प्रति अटूट समर्पण को जीवंत कर दिया।
प्रस्तुति में मीरा के जीवन के भावनात्मक संघर्ष, सामाजिक परिस्थितियों और उनकी अडिग भक्ति को संवेदनशीलता के साथ सामने रखा गया। मीरा के विषपान का दृश्य विशेष रूप से मार्मिक रहा। कलाकार की भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने इस प्रसंग को इतना प्रभावशाली बना दिया कि दर्शक भावविभोर हो उठे। इस दौरान मुक्ताकाशी मंच का वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक अनुभूति से भर गया।
‘नाटक समाज का जीवंत दर्पण’
इस अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कनौजे ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का जीवंत दर्पण है। यह हमारी संवेदनाओं, संघर्षों और सामाजिक सरोकारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। रंगमंच के माध्यम से कलाकार दर्शकों को सोचने, समझने और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि नाटक हमारी संस्कृति, परंपरा और मानवीय मूल्यों को समृद्ध करने के साथ ही समाज में संवाद और संवेदनशीलता का वातावरण तैयार करने का सशक्त माध्यम है।
साहित्य और कला जगत की हस्तियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार श्री विजय मिश्रा, श्री उदयभान चौहान, साहित्यकार श्री अरविंद मिश्ररूप सहित संस्कृति विभाग के कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
लोकभाषा और रंगमंचीय परंपरा को मिल रहा मंच
‘रंग परब’ नाट्य श्रृंखला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकभाषा, साहित्य, संस्कृति और रंगमंचीय परंपराओं को व्यापक मंच प्रदान किया जा रहा है। श्रृंखला में अलग-अलग रंग शैलियों और विषयों पर आधारित नाटकों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय कलाकारों और रंग संस्थाओं को मंच मिलने के साथ ही दर्शकों को भी विविध रंग प्रस्तुतियों से रूबरू होने का अवसर मिल रहा है। दूसरे दिन की प्रस्तुतियों को मिली उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया ने इस आयोजन की सार्थकता को और मजबूत किया।




