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छत्तीसगढ़ की जनजातीय औषधीय ज्ञान परंपरा का होगा वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण

एथ्नोबॉटैनिकल अध्ययन शुरू, बस्तर में विशेषज्ञों ने पारंपरिक वैद्यों और स्थानीय समुदायों से जुटाई जानकारी

रायपुर, 30 जुलाई 2026

एथ्नोबॉटैनिकल अध्ययन शुरू, बस्तर में विशेषज्ञों ने पारंपरिक वैद्यों और स्थानीय समुदायों से जुटाई जानकारी

जनजातीय औषधीय ज्ञान परंपरा प्रकृति के साथ तालमेल और स्थानीय वनस्पतियों पर आधारित एक प्राचीन और स्वदेशी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली है। यह ज्ञान मुख्य रूप से मौखिक परंपराओं के जरिए एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता है। इसमें विभिन्न पौधों के अंगों जैसे जड़, छाल, पत्ते और बीजों का उपयोग करके बीमारियों का इलाज किया जाता है।

एथ्नोबॉटैनिकल अध्ययन शुरू, बस्तर में विशेषज्ञों ने पारंपरिक वैद्यों और स्थानीय समुदायों से जुटाई जानकारी

छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय औषधीय ज्ञान परंपरा और वनस्पति आधारित पारंपरिक उपचार पद्धतियों को सुरक्षित रखने के लिए “एथ्नोबॉटैनिकल इन्वेस्टिगेशन ऑफ प्लांट्स यूज्ड बाय लोकल कम्युनिटीज इन छत्तीसगढ़” परियोजना के तहत क्षेत्रीय सर्वेक्षण का कार्य शुरू कर दिया गया है। इस अध्ययन का उद्देश्य जनजातीय समुदायों द्वारा उपयोग किए जाने वाले औषधीय पौधों और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान का वैज्ञानिक तरीके से दस्तावेजीकरण करना है।

बस्तर के जनजातीय क्षेत्रों में शुरू हुआ सर्वेक्षण

परियोजना के तहत विशेषज्ञों की टीम ने बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर स्थानीय जनजातीय समुदायों और पारंपरिक वैद्यों (जनजातीय चिकित्सकों) से संवाद किया। अध्ययन दल में डॉ. रवि कुमार, डॉ. अब्दुल करीम (यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रांस-डिसिप्लिनरी हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, बेंगलुरु) तथा डॉ. देवयानी शर्मा (जनजातीय चिकित्सा शोधकर्ता, छत्तीसगढ़) शामिल हैं।

औषधीय पौधों और पारंपरिक उपचार पद्धतियों का प्रलेखन

विशेषज्ञों ने जनजातीय समुदायों द्वारा औषधीय पौधों के उपयोग, उनकी पहचान, संग्रहण, संरक्षण और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होने वाले पारंपरिक ज्ञान का विस्तृत अध्ययन किया। इस दौरान अनुभवी जनजातीय वैद्यों और स्थानीय समुदाय के वरिष्ठ सदस्यों से महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र की गई।

जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

परियोजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक औषधीय वनस्पति ज्ञान का संरक्षण, वैज्ञानिक प्रमाणीकरण और सतत उपयोग सुनिश्चित करना है। इससे छत्तीसगढ़ की जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, जनजातीय औषधीय ज्ञान स्थानीय स्वास्थ्य परंपराओं का महत्वपूर्ण आधार है और भविष्य में औषधि अनुसंधान तथा नई दवाओं के विकास के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।

अन्य जनजातीय क्षेत्रों में भी होगा सर्वेक्षण

परियोजना के आगामी चरण में राज्य के अन्य जनजातीय क्षेत्रों में भी विस्तृत एथ्नोबॉटैनिकल सर्वेक्षण और दस्तावेजीकरण का कार्य किया जाएगा। यह पहल छत्तीसगढ़ की पारंपरिक ज्ञान संपदा को संरक्षित करने और स्थानीय समुदायों की सहभागिता को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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