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बकरी पालन बना आत्मनिर्भरता का आधार

देविका स्व-सहायता समूह ने बदली महिलाओं की जिंदगी

रायपुर, 27 जुलाई 2026

बकरी पालन आज ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत, उच्च प्रजनन क्षमता और मांस-दूध की निरंतर मांग के कारण आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का एक मजबूत आधार बन चुका है। इसे गरीबों की कामधेनु भी कहा जाता है क्योंकि यह भूमिहीन, छोटे किसानों और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का सबसे आसान जरिया है। बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के ग्राम चिन्नाकोडपाल की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और शासकीय योजना के सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (वाटरशेड विकास कार्यक्रम) के अंतर्गत मिली 50,000 रुपए की चक्रीय निधि ने देविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं को नई शुरुआत का अवसर दिया। इस राशि से समूह की महिलाओं ने बकरी पालन और सब्जी उत्पादन की गतिविधियां शुरू कीं और आज अपनी आय बढ़ाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

चक्रीय निधि से मिली नई शुरुआत

समूह की अध्यक्ष सरिता तेलम और सचिव लक्ष्मी तेलम के नेतृत्व में 10 सदस्यीय देविका स्व-सहायता समूह नियमित रूप से आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रहा है। समूह की महिलाओं ने आपसी सहयोग और सामूहिक प्रयास से बकरी पालन को अपनी आय का मजबूत आधार बनाया है। इसके साथ ही वे सब्जी उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर रही हैं। शासकीय योजना से मिली चक्रीय निधि ने महिलाओं को आर्थिक गतिविधि शुरू करने के लिए आवश्यक सहयोग दिया। समूह की महिलाओं ने इस अवसर का उपयोग मेहनत और एकजुटता के साथ किया और धीरे-धीरे अपनी आजीविका को मजबूत बनाया।

मजदूरी से आत्मनिर्भरता तक का सफर

समूह से जुड़ने से पहले महिलाओं की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। रोजगार के सीमित अवसरों के कारण अधिकांश महिलाएं मजदूरी पर निर्भर थीं। परिवार की जरूरतें पूरी करने में कई बार आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था और आवश्यकता पड़ने पर ऋण लेना भी मजबूरी बन जाता था। समूह से जुड़ने और बकरी पालन शुरू करने के बाद महिलाओं की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया। अब वे नियमित रूप से बचत कर रही हैं और जरूरत पड़ने पर समूह से ही कम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर रही हैं।

सामूहिक प्रयास से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति

बकरी पालन और सब्जी उत्पादन से होने वाली अतिरिक्त आय ने महिलाओं के परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत किया है। समूह की गतिविधियों से महिलाओं में बचत की आदत, वित्तीय अनुशासन और सामूहिक निर्णय लेने की भावना भी विकसित हुई है। अब महिलाएं केवल आय अर्जित ही नहीं कर रहीं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ आत्मविश्वास और समाज में नई पहचान भी मिली है।

आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायी मिसाल

देविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं की यह सफलता बताती है कि शासकीय योजनाओं का सही उपयोग, सामूहिक प्रयास और मेहनत मिलकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आज देविका स्व-सहायता समूह की महिलाएं बकरी पालन और सब्जी उत्पादन के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। उनकी यह सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है कि एकजुट होकर किया गया प्रयास न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकता है, बल्कि पूरे समुदाय के विकास का आधार भी बन सकता है।

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