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“मोर गांव मोर पानी“ अभियान बना जल संरक्षण की नई राह

350 आजीविका डबरियां और 150 से अधिक सामुदायिक तालाब से जल संरक्षण

भू-जल संवर्धन, सिंचाई विस्तार और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा स्थायी संबल

रायपुर, 08 जुलाई 2026

350 आजीविका डबरियां और 150 से अधिक सामुदायिक तालाब से जल संरक्षण

विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण के अंतर्गत मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में संचालित “मोर गांव मोर पानी“ अभियान जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए ग्रामीण विकास का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। अभियान के तहत जिले में 350 आजीविका डबरियों तथा 150 से अधिक सामुदायिक तालाबों का निर्माण, गहरीकरण एवं विकास किया गया है। इन कार्यों से वर्षा जल के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता मिलने लगी है।

जिले में मानसून के दौरान प्राप्त होने वाले वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निर्मित इन जल संरचनाओं से अब जल संरक्षण के सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं। आजीविका डबरियां एवं सामुदायिक तालाब वर्षा जल को संरक्षित कर भू-जल स्तर में वृद्धि करने के साथ-साथ खेतों में सिंचाई की उपलब्धता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे किसानों को खेती के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध होगा तथा फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

अभियान के अंतर्गत निर्मित 350 आजीविका डबरियां ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए अवसर भी सृजित करेंगी। इन डबरियों का उपयोग मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन, उद्यानिकी, पशुपालन तथा अन्य आजीविका गतिविधियों में किया जा सकेगा, जिससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। वहीं 150 से अधिक सामुदायिक तालाबों के निर्माण एवं गहरीकरण से गांवों में जल संचयन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इन तालाबों से सिंचाई, पशुओं के लिए पेयजल, भू-जल पुनर्भरण तथा पर्यावरण संरक्षण को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। गर्मी के मौसम में जल संकट से राहत मिलने के साथ-साथ जल स्रोतों की स्थिरता भी बनी रहेगी।

जिला प्रशासन द्वारा संचालित यह अभियान केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण के प्रति सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बन रहा है। ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों तथा ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। सामुदायिक सहयोग से निर्मित इन जल संरचनाओं का संरक्षण एवं नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि इनके दीर्घकालिक लाभ ग्रामीणों को निरंतर मिलते रहें।

जल संरक्षण ही भविष्य की जल सुरक्षा का आधार है। इसी सोच के साथ “मोर गांव मोर पानी“ अभियान के माध्यम से जल संसाधनों के संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। आने वाले समय में यह अभियान जिले को जल समृद्ध, आत्मनिर्भर और सतत विकास की दिशा में अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सभी ग्राम वासियों से अपील की है कि वे निर्मित आजीविका डबरियों एवं सामुदायिक तालाबों की सुरक्षा, स्वच्छता और संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएं। जन सहयोग से ही जल संरक्षण के इस अभियान को स्थायी सफलता मिलेगी और प्रत्येक गांव जल सुरक्षा की दिशा में आत्मनिर्भर बन सकेगा।

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