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चिरायु योजना बनी नई जिंदगी की उम्मीद

सफल ऑपरेशन के बाद अब दौड़ने लगा 10 वर्षीय मीर सय्यद सुल्तान अली

जन्मजात पैरों की बीमारी से मिली मुक्ति, डीकेएस अस्पताल रायपुर में हुआ निःशुल्क उपचार

रायपुर, 02 जुलाई 2026

सफल ऑपरेशन के बाद अब दौड़ने लगा 10 वर्षीय मीर सय्यद सुल्तान अली

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की चिरायु योजना ऐसे बच्चों के लिए आशा की किरण बन रही है, जो जन्मजात बीमारियों या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। समय पर पहचान, विशेषज्ञ उपचार और पूरी तरह निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से यह योजना बच्चों को स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के तहत विकासखंड मुंगेली के ग्राम प्रतापपुर निवासी 10 वर्षीय मीर सय्यद सुल्तान अली का जन्मजात पैरों की बीमारी का सफल एवं निःशुल्क ऑपरेशन कराया गया, जिसके बाद अब वह बिना किसी परेशानी के चल-फिर पा रहा है। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में जिले में चिरायु योजना का प्रभावी संचालन किया जा रहा है।

स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिरायु दल की चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोनिका कुर्रे एवं उनकी टीम ने मीर सय्यद सुल्तान अली के पैरों की जन्मजात समस्या की पहचान की। बच्चे के चलने में हो रही कठिनाई को देखते हुए टीम ने उसके परिवार को चिरायु योजना की जानकारी दी और उपचार की पूरी प्रक्रिया प्रारंभ कराई। बच्चे को 10 फरवरी 2026 को रायपुर स्थित डीकेएस अस्पताल में विशेषज्ञ अस्थि रोग चिकित्सकों को दिखाया गया। आवश्यक जांचों के बाद ऑपरेशन की सलाह दी गई। इसके पश्चात 12 मई 2026 को उसका सफल ऑपरेशन किया गया। उपचार और पुनर्वास के बाद अब मीर सय्यद सुल्तान अली सामान्य बच्चों की तरह सहजता से चल-फिर रहा है।

बच्चे के पिता वकार अली ने बताया कि आर्थिक स्थिति के कारण इतने बड़े उपचार की कल्पना भी कठिन थी, लेकिन चिरायु योजना के माध्यम से पूरे इलाज का खर्च शासन ने वहन किया। उन्होंने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल एवं स्वास्थ्य विभाग, चिरायु टीम और सभी संबंधित अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके बेटे को नया जीवन और उज्ज्वल भविष्य दिया है। इस सफलता में विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक श्री मनीष गुप्ता, प्रभारी जिला आरएमएनसीएचएन सलाहकार डॉ. अखिलेश कुमार बंजारे, चिरायु टीम की डॉ. मोनिका कुर्रे, सती ध्रुुव (एएनएम) एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रिय भूमिका रही।

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