Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Aj Ki News
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    • Login
    Aj Ki News
    Home»राज्य»छत्तीसगढ़»बीबी का ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ कराने कोर्ट पहुंचा पति, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिया यह जवाब
    छत्तीसगढ़

    बीबी का ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ कराने कोर्ट पहुंचा पति, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिया यह जवाब

    News DeskBy News DeskMarch 31, 2025No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    बीबी का ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ कराने कोर्ट पहुंचा पति, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिया यह जवाब
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

     बिलासपुर
     छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महिला को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि किसी भी महिला को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। यह फैसला जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने एक आदमी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

    पति ने अपनी पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट कराने की मांग की थी। वह साबित करना चाहता था कि उसकी पत्नी का किसी और के साथ अफेयर है।
    अदालत ने क्या सुनाया फैसला?

    कोर्ट ने कहा कि वर्जिनिटी टेस्ट की इजाजत देना महिला के मौलिक अधिकारों, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और उसकी निजी गरिमा के खिलाफ होगा। जज अरविंद कुमार वर्मा ने व्यक्ति द्वारा दायर आपराधिक याचिका के जवाब में यह टिप्पणी की।

    आदमी का कहना था कि वो अपनी पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट कराना चाहता था क्योंकि वो यह साबित करना चाहता था कि उसका पत्नी के साथ किसी के साथ अफेयर है।

    आदमी ने फैमिली कोर्ट के 15 अक्टूबर 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसका पति नपुंसक है और वह उसके साथ रिश्ते बनाने से इनकार करता है। कोर्ट ने आदमी से कहा कि वह अपनी नपुंसकता के आरोप को गलत साबित करने के लिए मेडिकल टेस्ट करा सकता है।

    पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसका पति नपुंसक है और उसने सहवास करने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता यह साबित करना चाहता है कि नपुंसकता के आरोप निराधार हैं, तो वह संबंधित मेडिकल टेस्ट करा सकता है या कोई अन्य सबूत पेश कर सकता है। उसे पत्नी का कौमार्य परीक्षण कराने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हाई कोर्ट द्वारा 9 जनवरी को पारित आदेश को हाल ही में उपलब्ध कराया गया।

    हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा अपनी पत्नी के कौमार्य परीक्षण की मांग करना असंवैधानिक है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है, जिसमें महिलाओं के सम्मान का अधिकार शामिल है। भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 न केवल जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है, बल्कि सम्मान के साथ जीने का अधिकार भी देता है, जो महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

    कोर्ट ने कहा कि किसी भी महिला को अपना कौमार्य परीक्षण कराने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अनुच्छेद 21 के तहत दिया गया व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार अपरिवर्तनीय है और इसके साथ किसी भी तरह से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।

    हाई कोर्ट ने कहा, "चाहे जो भी हो, लेकिन किसी भी मामले में प्रतिवादी को कौमार्य परीक्षण की अनुमति देना उसके मौलिक अधिकारों, प्राकृतिक न्याय के प्रमुख सिद्धांतों और एक महिला की शील के विरुद्ध होगा।

    पीठ ने आगे कहा कि दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ लगाए गए आरोप साक्ष्य का विषय हैं। साक्ष्य के बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जा सकता है। हाई कोर्ट का विचार है कि फैमिली कोर्ट का आदेश न तो अवैध है और न ही विकृत है। इस जोड़े ने 30 अप्रैल 2023 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया। महिला कोरबा जिले में पति के पारिवारिक आवास पर साथ रहती थी।

    याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि पत्नी ने कथित तौर पर अपने परिवार के सदस्यों से कहा कि उसका पति नपुंसक है। उसने अपने पति के साथ सहवास करने से इनकार कर दिया। उसने 2 जुलाई 2024 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 144 के तहत रायगढ़ जिले के फैमिली कोर्ट में अपने पति से 20000 रुपए के भरण-पोषण की मांग करते हुए एक अंतरिम आवेदन दायर किया।

    भरण-पोषण दावे के अंतरिम आवेदन के जवाब में याचिकाकर्ता ने अपनी पत्नी का कौमार्य परीक्षण कराने की मांग की। आरोप लगाया कि वह अपने देवर के साथ अवैध संबंध में थी। दावा किया कि उसने कभी अपनी पत्नी से शारीरिक संबंध नहीं बनाए।

    15 अक्टूबर 2024 को रायगढ़ की फैमिली कोर्ट ने पति के अनुरोध को खारिज कर दिया। इसके बाद पति ने हाई कोर्ट में आपराधिक याचिका दायर की। मामला फिलहाल फैमिली कोर्ट में साक्ष्य के स्तर पर है।

    HC- नहीं दी जा सकती वर्जिनिटी टेस्ट की अनुमति

        हाई कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता यह साबित करना चाहता है कि नपुंसकता के आरोप निराधार हैं, तो वह संबंधित चिकित्सा टेस्ट करवा सकता है या कोई अन्य सबूत प्रस्तुत कर सकता है।
        हाल ही में उपलब्ध कराए गए 9 जनवरी को पारित हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया है, "उसे संभवतः पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट करवाने और अपने साक्ष्य में कमी को पूरा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

    मामला क्या है?

    इस कपल की शादी 2023 में हुई थी। पत्नी ने कथित तौर पर अपने परिवार के सदस्यों से कहा कि उसका पति नपुंसक है, और उसने वैवाहिक संबंध स्थापित करने से इनकार कर दिया। उसने अपने पति से ₹20,000 का भरण-पोषण मांगा।

    याचिकाकर्ता ने जवाब दिया, फिर अपनी पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट कराने की मांग की और आरोप लगाया कि वह अपने देवर के साथ अवैध संबंध में है।

    News Desk

    Related Posts

    प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान से प्रेरित होकर मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने छोड़ा विशेष प्रोटोकॉल वाहन

    May 13, 2026

    मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : शासन बना बेटियों का संबल और सामूहिक विवाह बना सामाजिक बदलाव का उत्सव

    May 13, 2026

    प्रधानमंत्री आवास निर्माण तेजी से पूरा कराने लगी जनचौपाल

    May 13, 2026

    सुशासन तिहार में मिली राहत : समाधान शिविर में बना आयुष्मान कार्ड

    May 13, 2026

    सुशासन तिहार बना स्वास्थ्य का सहारा : वनांचल की महिलाओं तक पहुंची जांच और जागरूकता

    May 13, 2026

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने छोड़ा विशेष प्रोटोकॉल और सुरक्षा काफिला राष्ट्र प्रथम की भावना से ऊर्जा संरक्षण का संदेश

    May 13, 2026
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    Übersicht über Wettanbieter ohne Lugas: Top 10 im Vergleich

    May 14, 2026

    प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान से प्रेरित होकर मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने छोड़ा विशेष प्रोटोकॉल वाहन

    May 13, 2026

    मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : शासन बना बेटियों का संबल और सामूहिक विवाह बना सामाजिक बदलाव का उत्सव

    May 13, 2026

    प्रधानमंत्री आवास निर्माण तेजी से पूरा कराने लगी जनचौपाल

    May 13, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    Ajkinews Office
    Ajkinews Office
    Chief Editor :-Asha Nirmal
    For Advertising Call :-
    WhatsApp :-
    Email ID :-[email protected]
    Address :-
    Shop No 12, Mathpara Pujari Vatika, New Bus Stand Road, Raipur-492001, Raipur, Chhattisgarh

    May 2026
    M T W T F S S
     123
    45678910
    11121314151617
    18192021222324
    25262728293031
    « Apr    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 Ajkinews.com . Designed by Grabatic Pvt. Ltd..

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.